नक्सलियों की तरफ से सशर्त शांति वार्ता की पेशकश   

   
                                                              सांकेतिक फोटो

टी.आर.पी. न्यूज -                      
  
बस्तर। बस्तर में सुरक्षाबलों की लगातार दबिश से परेशान नक्सलियों ने सरकार से  शांति वार्ता की पेशकश की है। एक कथित पत्र में यह बात कही गी है कि यदि नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन बंद करने का घोषणा करती है तो नक्सली भी युद्ध विराम करने को तैयार है।पत्र सेंट्रल कमेटी का प्रवक्ता अभय ने तेलगु भाषा में जारी किया है। भाजपा सरकार ने जो दबाव बनाया है और उसके पहले भी  शांति वार्ता की बात हुी पर  महत्वपूर्ण पहल न होने से बात नही बनी थी।

    भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने राज्य सरकारों के साथ मिलकर माओवादी-प्रभावित क्षेत्रों से  नक्सलियों को समाप्त करने   ‘कागर’ नामक एक गहन आतंकवाद विरोधी अभियान शुरू किया।जिसके चलते यह स्थिती सामने आई है।
         शांति वार्ता को सफल  बनाने के लिए भारत सरकार से सीपीआई (माओवादी) ने बिना शर्त, सरकार व क्सलियों के बीच युद्ध विराम की मांग करते हुएबुद्धिजीवियों, मानवाधिकार संगठनों, पत्रकारों, छात्रों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं से शांति वार्ता के लिए सरकार पर दबाव बनाने का आग्रह किया। 
सीपीआई (माओवादी) की ओर से कथित रुप से कहा गया बै कि 400 से अधिक माओवादी  कार्यकर्ता और आदिवासी नागरिक कथित तौर पर मारे गए हैं। महिला माओवादियों को कथित तौर पर सामूहिक यौन हिंसा  का सामना करना पड़ा ।  कई नागरिकों को गिरफ्तार कर उन्हें अवैध हिरासत और यातना दी गई ।इन सब बातों को ध्यान में रखकरशांति वार्ता के लिए 
माओवादियों की शर्तें -  प्रभावित आदिवासी क्षेत्रों से सुरक्षा बलों की तत्काल वापसी।  नई सैन्य तैनाती न हो। आतंकवाद विरोधी अभियानों को रोकना। सरकार उनकी शर्तों पर सहमत होती है तो वे बातचीत में शामिल होने की इच्छा व्यक्त करते हैं। जैसे ही सरकार सैन्य अभियान बंद करेगी, वे युद्ध विराम की घोषणा कर देगें। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इस मामले में क्या कदम उठाती है।.